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क्या मन को वश में किया जा सकता है?

जब हम कभी मन को वश में करने की बात करते हैं तो हमारे मन में उबाऊ सी प्रक्रियाएं आती है। जिनको करने में काफी समय लग जाता है। मन हमेशा हमें उस काम को करने हेतु मना करता है जिससे कि जीवन में सफलता मिले। आश्चर्य होता है कि हम फिर भी इसे अपना मित्र मानते रहते हैं तो भला किस प्रकार हम इस मन को बिना किसी उबाऊ प्रक्रिया के वश में करें।

                    मन का कार्य

मन हमेशा हमें नया बहाना खोजने की सलाह देता है जैसे कि-( सुबह अलार्म बजने पर ऐसा नहीं कहता अलार्म बंद करके सो जा नहीं वह कहता है कुछ देर सो जाता हूं फिर उठूंगा) यही मन की चाल है इसी प्रकार मन कार्य करता है यह हमें संतुष्ट करता है और मित्र बनने का प्रयास करता है और अंत में देर से उठने पर कहता है (देखा आज भी तू जल्दी नहीं उठा) ‌ और इस प्रकार हमें हमेशा अपनी चालाकी से विचलित कर लेता है।

                महापुरुषों के कथन (peace of mind)

* महात्मा बुद्ध की कई विचारों में से एक विचार है कि जो अपने ही मन द्वारा पराजित है वह दूसरे को कभी पराजित नहीं कर सकता।

* स्वामी विवेकानंद जी कहते थे मन को वश में करके ही मैंने जगत में यश सम्मान तथा कीर्ति पाई है।

*गीता के तीसरे अध्याय में अर्जुन कृष्ण भगवान से पूछता है कि मैं वायु को वश में कर सकता हूं परंतु मन को वश में करना मुझे वायु को वश में करने से भी अधिक कठिन लगता है

*कृष्ण कहते हैं यह चंचल मन का स्वभाव है तुम अभ्यास करके(spritual practice) तथा विरक्ति द्वारा (detachment) के द्वारा इसे वश में कर सकते हो।

                       विधियां

जैसा कि आपने देखा भगवान बुध द्वारा स्वामी विवेकानंद जी द्वारा तथा भगवान कृष्ण द्वारा मन को चंचल शत्रु बताया गया है और यह इतना कठिन भी नहीं है जितना अभी आपको लग रहा अगर आप 21 दिन तक केवल इन प्रक्रियाओं को करते हैं तो आप निश्चित रूप से इसकी चालों को भलीभांति समझ जाएंगे।  ््

 सर्वप्रथम आपको अपनी पांच इंद्रियों को आंख, कान, नाक, जीभ, त्वचा। को वश में करना सीखना होगा जैसा कि (मैं आंखों से वही देखूंगा जो मेरे काम का है)। इसी प्रकार मैं कान से वही सुनूंगा जो मेरे काम का है और वही चीजें स्पर्श करूंगा जो निश्चित रूप से मेरे काम का है)   

*यह कुछ इस प्रकार है जब आप आम का पौधा बोलेंगे तो आपको आम मिलेगा जैसा आप देखोगे खाओगे जैसा पढ़ोगे आपके दिमाग में वही विचार आएंगे  आपको अपनी इंद्रियों को अच्छे कार्यों में लगाना होगा जिससे कि वह आपके मन में सुविचार डालें।

आप कुछ अच्छा पढ़ सकते हो आप कुछ अच्छा देख सकते हो जैसे कि आप विवेकानंद जी की जीवनी पढ़ सकते हो भगवत गीता पढ़ सकते हो इससे यह होगा कि अगर आप मन में अच्छा डालोगे तो आपको अच्छा प्राप्त होगा और कूड़ा करकट डालोगे तो कूड़ा करकट प्राप्त होगा (good in good out garbage in garbage out) जीभ को आप उन्हीं चीजों को खाने के लिए लगाएं जो खाने योग्य है जिनसे तबीयत खराब होती है जैसे जंक फूड इन्हें कम कर दे इसे भी हमारा मन वश में रहता है। 

आप यह देखेंगे कि जब आप अपनी इंद्रियों को वश में करने लग गए हैं एक हफ्ते में ही आप अपने में सुधार देखने लगेंगे प्रथम 3 दिन यह बहुत ही कठिन होगा क्योंकि आपका मन इसे स्वीकार नहीं करेगा परंतु उसकी समय आपको अपने मन को हराना होगा अगर आप इन विधियों का पालन करते हैं तो 21 दिन में आप अपने मन को वश में कर सकते हैं व और भी बहुत कुछ है जो कि मैं अपने नेक्स्ट आर्टिकल में बताऊंगा जोकि (spirituality) अध्यात्म से रिलेटेड होगा।





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