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हमारी चर्चा का विषय अत्यंत ही उत्तम तथा उत्कृष्ट है-भगवान श्री कृष्ण।😇
महाराज परीक्षित कथा सुखदेव गोस्वामी के बीच विचार विमर्श 🗣️में देखा गया एक अत्यंत पतित तथा सभी प्रकार के पाप कर्म करने वाले ब्राह्मण की रक्षा एकमात्र कृष्ण के पवित्र नाम का कीर्तन📿 करने के कारण हुई।
श्रीमद भगवतम में हमें ब्रह्मांड में अधोलोकों🌌 एवं स्वर्गीय 🌕उच्च लोकों के वर्णन मिलते हैं। श्रीमद भगवतम 📖में इन लोकों की सही सही स्थिति एवं गृह से उनकी दूरी का वैसा ही संकेत मिलता है जैसा कि खगोलज्ञों ने अनुमान लगाया है कि चंद्रमा🌕 तथा अन्य ग्रह 🌍(लोक) पृथ्वी से कितने दूर हैं।
सुखदेव गोस्वामी से ऐसे ग्रहों का वर्णन सुनने पर परीक्षित महाराज ने कहा-💁
हे महाभाग! मैंने आपसे नर्क👹 लोकों के विषय में सुना। जो लोग अत्यंत पापी होते हैं वह इन लोकों को भेजे जाते हैं।
परीक्षित महाराज वैष्णव (भक्त)😇 थे एक वैष्णव सदा औरों के कष्ट के प्रति दया का अनुभव करता है।
एक वैष्णव दया का सागर होता है। कृष्ण शुद्ध वैष्णव के चरण कमलों पर किए गए अपराधों को कभी नहीं सह सकते अतः हमें वैष्णव की निंदा नहीं करनी चाहिए।🙅
वञ्छा कल्पतरु- प्रत्येक व्यक्ति कामना🤔 करता है लेकिन वैष्णव इन समस्त कामनाओं को पूरा कर सकता है।🌹
कल्पतरू आध्यात्मिक जगत के वृक्ष का द्योतक है जो सर्व मनोकामना पूरी करने वाला वृक्ष होता है।🌳
वैष्णव को महाभाग कहकर संबोधित किया गया है। जिसका अर्थ होता है "भाग्यशाली।🤗"जो मनुष्य वैष्णव बनता है और भगवद् भावना भावित होता है। उसे परम भाग्यशाली समझा जाता है।
पद्मा पुराण के अनुसार जीवों की 8400000 🐯🐱🐼🐗योनियां हैं। और वर्तमान कर्म के अनुसार उसे उस प्रकार की योनियों में जाना होता है। यहां पर "जैसा बोओ वैसा काटो"🪵का सिद्धांत लागू होता है।(Krishna)
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु कहते हैं की भौतिक जगत में देहांतर करने वाले इन असंख्य जीवों में से कोई विरला ही🙆 इतना भाग्यशाली होता है कि वह कृष्णभावनामृत को ग्रहण कर सके। यद्यपि कृष्णभावनामृत सर्वत्र निशुल्क बट रहा है फिर भी हर व्यक्ति इसे ग्रहण नहीं कर पा रहा इस कलयुग में तो विशेष रूप से।🤷
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