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जीभ के स्वाद👅 हेतु पशु हत्या

कानून👮 के अनुसार यदि कोई किसी को मार डालता है तो उसे मृत्युदंड की सजा होती है जीवन के बदले जीवन लेने की विचारधारा नयी नहीं है। अपितु यह मानव जाति के लिए कानून का ग्रंथ 📖,मनुसंहिता में पायी जाती है।

*उसमें यह कहा गया है कि जब राजा🤴 किसी हत्यारे को फांसी देता है तो वास्तव में उससे हत्यारा लाभान्वित होता है क्योंकि यदि उसे मारा💀 नहीं जाता है, तो वह अपनी हत्या का फल अपने साथ लेता जाएगा और उसे अनेक प्रकार से कष्ट भोगने पड़ेंगे।(Krishna)

( मनु संहिता में 'जीवन के बदले जीवन' का अधिकार दिया गया है🙎)(peace of mind)

*इसी प्रकार अन्य ऐसे नियम भी है जिनके अनुसार मनुष्य 🧍एक चींटी 🐜को भी नहीं मार सकता अगर वह ऐसा करता है तो उसकी जिम्मेदारी उसे स्वीकार करनी होगी🤷।

(क्योंकि एक मनुष्य 🚶‍♂️में स्थित आत्मा 👻तथा एक चींटी🐜 में स्थित आत्मा में कोई भेद नहीं अतः उनका शरीर का भेद है चाहे हम 👑ब्रह्मा(उच्च पद) से लेकर एक चींटी🐜 तक को देखें तो दोनों में जीव (आत्मा) एक ही है।)

१- हम किसी जीव🐔 को उत्पन्न नहीं कर सकते हैं, अतः हमें उसे मारने🐐 का अधिकार भी नहीं है; अतः जो मानव निर्मित नियम मनुष्य की हत्या तथा पशु की हत्या करने में भेदभाव बरतते हैं वे अपूर्ण हैं।

२-यद्यपि मानव निर्मित नियमों में दोष रहते हैं🤷 किंतु ईश्वरीय नियमों में कोई दोष नहीं 🙅रह सकते ईश्वरीय नियमों के अनुसार किसी पशु🐐 की हत्या किसी मनुष्य की हत्या के ही समान दंडनीय है।🙎

यहां तक कि दस आदेशों (बाइबल)📓 में भी विधान है।    "तुम हत्या नहीं करोगे"। (Thou shall not kill) किंतु वे लोग इस में अटकलबाजी🤦 डालकर कहते हैं मैं मनुष्य की हत्या नहीं करूंगा🙅,लेकिन पशु की हत्या करूंगा।🤷

*हर कोई ईश्वर का प्राणी है, यद्यपि उसका शरीर या वस्त्र 🧥भिन्न भिन्न है। ईश्वर को उन सबका परमपिता माना जाता है पिता के अनेक पुत्र🧑‍🤝‍🧑 हो सकते हैं जिनमें से कुछ बुद्धिमान🧠 हो सकते हैं और कुछ नहीं।

*लेकिन यदि बुद्धिमान🤨 पुत्र पिता से कहे, मेरा भाई अधिक बुद्धिमान नहीं है,😤 अतः मुझे उसे मार डालने दें।"तो क्या पिता राजी हो जाएगा?🤷 केवल इसलिए कि एक पुत्र अधिक बुद्धिमान नहीं है और दूसरा पुत्र उसके भार से बचने के लिए उसे मार डालना चाहता है;  तो पिता इसके लिए कभी भी राजी नहीं होगा🙅। इसी प्रकार यदि ईश्वर परमपिता है तो भला वह पशुओं🐐🐔 का वध करने के लिए स्वीकृति क्यों देने लगे, भगवत गीता📖 में भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं🗣️ सारी 8400000 योनियों उनकी संतानें हैं।(Health)

अतः हमें केवल अपने जीभ 👅के स्वाद के लिए किसी भी पशु🐔 का वध🤾 नहीं करना चाहिए🙎 हां हो सकता है की मांस अधिक स्वादिष्ट 🤷हो लेकिन किसी के जीवन से अनमोल नहीं🙏👉 अगर मैं यह कहूं कि स्वाद के लिए आप अपने प्रिय जनों का मांस खाइए 👈तो आप इसके लिए कभी राजी नहीं होंगे और परिवार के सदस्य भी इसका विरोध करेंगे उसी प्रकार भगवान को भी बिलकुल अच्छा नहीं लगता कि कोई उनके द्वारा उत्पन्न संतान का वध करें केवल अपने स्वाद भर के लिए । और मांस🍖 खाने से हमारे हृदय 🫀में करुणा भी नष्ट होती है जिससे कि हम कभी भी दूसरे की परेशानी उस हद तक नहीं समझ पाएंगे और भगवान की भक्ति में मांस का परित्याग जरूरी है।🧘

                      हरे कृष्णा 🙏








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