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लोग अगले जन्म में विश्वास नहीं करते हैं क्योंकि वह व्यर्थ की झंझट तथा दंड से बचना चाहते हैं लेकिन अगले जन्म से बचा नहीं जा सकता।🙅 केवल यह सोचने भर से की अगला जन्म नहीं होता फिर भी आपको दंड तथा जन्म तो लेना होगा।🙎
यदि कोई अपराध करता है तो सरकार उसे दंडित करेगी। किंतु कभी-कभी अपराधी सरकार द्वारा दंडित होने से बच निकलता है (लेकिन ईश्वरीय नियम के बारे में ऐसा नहीं होता)कोई भले ही दूसरों को धोखा दे ले, चोरी करके छिप जाए और इस तरह राज्य के दंड से अपने को बचा ले किंतु वह अपने आप को श्रेष्ठ नियम या प्रकृति के नियम से नहीं बचा सकता।
* यदि वह सोचता है कि मेरे पापों का साक्षी कौन है-दिन का प्रकाश🌅 साक्षी है चांदनी🌝 साक्षी है वायु 🌬️साक्षी है और कृष्ण तो सबसे बड़े साक्षी हैं।👇
* इस तरह कोई यह नहीं कह सकता "मैं यह पाप कर रहा हूं किंतु मुझे कोई नहीं देख सकता।"कृष्ण सबसे बड़े साक्षी हैं क्योंकि वह ह्रदय में विराजमान हैं।
(सर्वस्य चाहं ह्रदि सन्विष्ट:)- मैं हर एक के ह्रदय🫀 में स्थित हूं।👉
(मत्त: स्मृति ज्ञानम अपोहनं च)- मुझसे ही स्मृति🧠, ज्ञान📖 तथा विस्मृति🤔 उत्पन्न होते हैं।"
* इस प्रकार कृष्ण हमें अवसर प्रदान करते हैं। यदि हम कृष्ण को चाहते हैं तो वह हमें उन्हें प्राप्त करने का अवसर देंगे💁 और यदि हम कृष्ण को नहीं चाहते तो वह हमको उन्हें भूल जाने का अवसर देंगे🤷।
* यदि हम कृष्ण को भूलकर जीवन का आनंद उठाना चाहते हैं तो कृष्ण हमें ऐसी सुविधाएं प्रदान करेंगे कि हम उन्हें भूल जाएं, किंतु यदि हम अपना जीवन कृष्णभवनामृत में बिताना चाहते हैं तो कृष्ण हमें प्रगति करने के लिए अवसर प्रदान करेंगे।(Krishna)🙇
* क्योंकि गीता के अंत में भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं
(यथेच्छसि तथा कुरू)। -अर्जुन को उपदेश देने के बाद उन्होंने इतना ही कहा अब मैं तुम्हें सब कुछ बता चुका हूं अब जो चाहो सो करो।🤷
अर्जुन ने कहा- (करिष्ये वचन तव)। मैं आपके आदेश का पालन करूंगा यह है कृष्णभावनामृत।🙆
अतः जो अर्जुन की तरह भगवान के आदेश का पालन करेगा उसकी सदैव जीत होगी चाहे वह आध्यात्मिक स्तर पर हो या भौतिक स्तर पर। (peace of mind)
हरे कृष्णा🙏
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